Sakat Chauth Vrat Katha in Hindi, Puja Time 2017 and Puja Procedure

Sakat Chauth Vrat Katha

Sakat Chauth 15thJanuary 2017 (Sunday)

Sakat Chauth Puja Time – Moonrise on Sakat Chauth Day ~ 21:03

Chaturthi Tithi Begins ~ 11:39 on 15th January 2017

Chaturthi Tithi Ends ~ 11:15 on 16th January 2017

Sakat Chauth Vrat katha

People usually observe fast on Krishna Paksha Chaturthi dedicated to Lord Ganesha. In North India, during the month of Magh (January – February), Krishna Paksha Chaturthi is celebrated as Sakat Chauth dedicated to Goddess Sakat (Chauth Maata).  Sakat Chauth is also known by the name of Til-Kutta Chauth, Vakra-Tundi Chauth, Sankat Chauth and Maghi Chauth.

Women observe fast on this day for the well-being of their children from sunrise to moonrise. In evening, puja is performed by narrating the Sakat Chauth Vrat Katha in Hindi and offering Tilkutt (prepared with roasted and grounded sesame seeds with ghee and jaggery) to Lord Ganehsa and Goddess Sakat. Lord Ganesha removes all the obsatcles in life of his devotees who observe this fast.

Sakat Chauth Vrat Katha in Hindi

एक साहूकार और साहूकारनी थे । उन दोनों में कोई भी धर्म या पुण्य नहीं करता था । उन के कोई भी संतान नहीं थी, इसिलए वे दोनों बहुत दुखी रहते थे । एक दिन उनकी पड़ोसिन ने उन्हें सकट चौथ के व्रत के बारे में बताया ।

उसने बताया कि सकट का व्रत करने से अन्न, धन, सुहाग व् पुत्र की प्राप्ति होती है । उसी दिन सकट चौथ थी, साहूकारनी ने व्रत रख लिया और बोली कि जब मेरे लड़का होगा तब मैं ढाई सेर का तिलकुट्टा करुँगी । जब लड़का हो गया तो बोली – जब इसका विवाह होगा, तब मैं सवामन का तिलकुट्टा करुँगी । अब विवाह भी पक्का हो गया परंतु उसने तिलकुट्टा नहीं करा । चौथ माता और गणेश जी आपस में बात करने लगे कि इसने हमें ठग लिया और हमसे अपने सब काम करा लिए, इसको सबक सिखाना पड़ेगा ।

जब उसके तीन फेरे पड़ गए, चौथे फेरे के समय चौथ माता आंधी के रूप में आयी और उस लड़के को उठा के ले गयी  और गणेश जी ने उस लड़के को पीपल के पेड़ पर बैठा दिया । सभी लोग हैरान रह गए कि लड़का कहाँ चला गया । सभी जगह ढूंढ लिया पर लड़का कहीं नहीं मिला ।

कई दिन बीत गए, जब वह लड़की गांव के बाहर दूब लेने जाती, तब पीपल के पेड़ में से आवाज़ आती कि "आ मेरी अध् ब्याही आ " । यह बात उसने अपनी माँ को बताई, तब उसकी माँ ने अपना दामाद पहचान लिया । उस लड़के ने बताया कि मैं चौथ माता और गणेश जी कि शरण में हूँ । वे दोनों मेरी माँ से नाराज़ हैं क्योंकि उन्होंने बोला हुआ तिलकुट्टा नहीं किया ।

जब उसकी माँ को यह पता चला, तब वह पीपल के पेड़ के पास जाकर बोली – कि जब मेरे बेटे बहु घर आ जायेंगे, तब मैं ढाई मन का तिलकुट्टा करुँगी । अब चौथ माता और गणेश जी दोनों राज़ी हो गए । लड़के के अब फेरे पड़ गए और उसकी माँ ने अब ढाई मन का तिलकुट्टा भी कर दिया । तभी से साहूकारनी ने चौथ माता के व्रत शुरू कर दिए और सारे गांव में ढिंडोरा पिटवा दिया कि सभी सुहागिन स्त्री तिलकुट्टा करके चौथ माता का व्रत करें ।

After this Sakat Chauth Vrat Katha, Lord Ganesha story is also narrated.

May Goddess Sakat and Lord Ganesha shower their blessings on all their devotees.

Wish all of you a very Happy Sakat Chauth !

 

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